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जापान के संविधान और धर्म को लेकर किया गया दावा फर्जी है

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सोशल मीडिया पर जापान को लेकर एक पोस्ट वायरल है। पोस्ट में लिखा है कि जापान का संविधान सन 1287 में बना था और जापान के संविधान का पहला आर्टिकल बुद्धम शरणम गंच्छामि है। इसके साथ ही दावा किया जा रहा है कि जापान एक बुद्धिस्ट देश है इसलिए जापान तरक्की पर है।

मौर्य वंश की बेटी‘ नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, ‘जापान एक बुद्धिस्ट कंट्री है ,, इसलिए जापान तरक्की पर है ,,, भारत भी पहले तरक्की पर था “सम्राट अशोक” के समय !’

मनीष भास्कर ने लिखा, ‘जापान एक बुद्धिस्ट कंट्री है ,, इसलिए जापान तरक्की पर है ,,, भारत भी पहले तरक्की पर था “सम्राट अशोक” के समय !’

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फैक्ट चेक

क्या सन 1287 में बना था जापान का संविधान?

इस दावे की पड़ताल के लिए हमने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें Prime Minister’s Office of Japan की वेबसाइट मिली। जिसके मुताबिक, 1287 में जापान में कोई लिखित संविधान नहीं था। उस समय जापान में कामाकुरा शोगुनेट का शासन था। जापान का पहला आधिकारिक आधुनिक संविधान सम्राट मेइजी के शासनकाल में “मेइजी संविधान” के नाम से सन 1889 में घोषित हुआ था। मेइजी संविधान को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निरस्त कर दिया गया, और उसकी जगह नया जापानी संविधान 3 मई 1947 से लागू हुआ।

Source: Prime Minister’s Office of Japan

क्या जापान के संविधान का पहला आर्टिकल ‘बुद्धम शरणम गंच्छामि’ है?

जापान के संविधान का पहला आर्टिकल ‘बुद्धम शरणम गंच्छामि’ नहीं है। यह शब्द जापान के पूरे संविधान में कहीं नहीं है। Prime Minister’s Office of Japan की वेबसाइट और जापान के संविधान के अनुसार संविधान का अनुच्छेद 1 देश के मूल सिद्धांतों को स्थापित करता है। इसमें लिखा है, सम्राट राज्य और जनता की एकता का प्रतीक होगा। उसकी स्थिति जनता की इच्छा से निर्धारित होगी, जिसमें सम्प्रभु सत्ता निहित है।”

Source: Prime Minister’s Office of Japan

क्या जापान एक बुद्धिस्ट देश है?

जापान के संविधान के अनुसार जापान एक धर्मनिरपेक्ष देश है। जापान ने खुद को “बौद्ध राष्ट्र” घोषित नहीं किया है और ना ही किसी एक धर्म को राष्ट्रीय पहचान के रूप में अपनाया गया है। यहां पर शिंतो और बौद्ध धर्म दोनों प्रमुख रूप से माने जाते हैं। जिसमें शिंतो धर्म को मानाने वालों की संख्या सबसे अधिक है। 2021 में जापान के आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय (Ministry of Internal Affairs and Communications) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जापान की जनसंख्या में 48.1% लोग खुद को शिंतो अनुयायी मानते हैं और 46.5% लोग खुद को बुद्धिस्ट बताते हैं।

Source: Voyapon
दावा जापान का संविधान 1278 में अपनाया गया था और इसका अनुच्छेद 1 ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ है। साथ ही जापान एक बुद्धिस्ट देश है।
दावेदार मौर्य वंश की बेटी
निष्कर्ष जापान का संविधान 1947 में लागू हुआ, इसका अनुच्छेद 1 सम्राट को प्रतीक मानता है, न कि “बुद्धं शरणं गच्छामि”, और जापान कोई बौद्ध राष्ट्र नहीं बल्कि एक धर्मनिरपेक्ष देश है।

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