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Home राजनीति संभल में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन का हिंसा से लेना देना नहीं है
राजनीति

संभल में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन का हिंसा से लेना देना नहीं है

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उत्तर प्रदेश संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा को लेकर सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक भी उपद्रवी नहीं बचना चाहिए। जिन लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया है, उसे वापस ठीक कराने का खर्च उन्हीं उपद्रवियों से वसूला जाए। इस बीच सोशल मीडिया में लोग दावा कर रहे हैं कि संभल में मुसलमानों की हत्या के बाद योगी सरकार बुलडोजर से अत्याचार कर रही है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उल्लंघन किया गया है।

फेक न्यूज पेडलर सदफ आफरीन ने लिखा, ‘यूपी, संभल हाल ही में सम्भल में 6 मुस्लिम युवकों की हत्या कर दी गई! अब योगी सरकार सम्भल में बुलडोजर से अत्याचार कर रही है! योगी जी का कानून सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है??’

ब्रजेश मिश्रा ने लिखा, ‘संभल में जिहादियों और पत्थरबाजों के घरों पर बुल्डोजर चल रहा है लेकिन ये बुल्डोजर कुछ लोगों के छाती पर चल रहा हो ऐसा लग रहा है।’

असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, ‘सांभल में आज जो बुलडोज़र एक्शन हुआ वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन्स के मुताबिक 15 दिन की नोटिस होनी चाहिए, जिनका घर टूटने वाला है उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए, और बुलडोज़र को किसी मुजरिम को सजा देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।योगी सरकार एक पूरे समाज को सजा दे रही है। उनका जुर्म बस यही है कि उन्होंने अपने संविधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया। जो सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मान सकती, वो सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर रही है। क्या ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक है?’

कांग्रेस नेता विजय सिंह ने लिखा, ‘संभल में चला बुलडोजर साफ बता रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार करने को तत्पर है। कोई तो इस बुलडोजर बाबा को समझाए कि वे केवल चुने हुए प्रतिनिधि हैं, प्रदेश के मालिक नहीं! अब यह देखना होगा कि संविधान का रक्षक होने का दावा करने वाली सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेती है या फिर मौन रहकर इस अन्याय को बढ़ावा देती है।’

सपा नेता आईपी सिंह ने लिखा, ‘यूपी संभल जिले में योगी सरकार बुलडोजर चलवा रही है माननीय सुप्रीम कोर्ट को ठेंगा दिखाते हुए। जहाँ 5 युवा पुलिस की गोली से शहीद हो गये। बुलडोजर सरकार मतलब योगी आदित्यनाथ जज अभी अपने पर कायम है।’

फैक्ट चेक

पड़ताल में हमे आजतक की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि संभल में 19 नवंबर से तनाव व्याप्त है, जब अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था क्योंकि दावा किया गया था कि इस स्थल पर पहले हरिहर मंदिर था। संभल में 24 नवंबर को हिंसा भड़क उठी जब प्रदर्शनकारी मस्जिद के पास एकत्र हुए और सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए। हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि संभल में 24 नवम्बर को हिंसा हुई थी।

इसके बाद हमे टीवी9 भारतवर्ष पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। 5 दिसम्बर 2024 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नगर पालिका परिषद ने चंदौसी क्षेत्र में बुलडोजर की मदद से अवैध दुकानों को तोड़ा। देर शाम तक यह कार्रवाई जारी रही, प्रशासन की माने यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अतिक्रमण हटाने का काम पिछले एक महीने से चल रहा है। इस अभियान के जद में यूपी सरकार की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के पिता की दुकान भी थी, जिसे खुद मंत्री ने हथौड़ा चलाकर तोड़ा था। अतिक्रमण की कार्रवाई मार्केट को व्यवस्थित बनाने को लेकर चल रही है जिसमें सभी नियमों का पालन किया गया है। डीएम ने बुलडोज़र चलाने से पहले रिक्शे पर बैठकर मुआयना किया था और लोगों से सहयोग की अपील की थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि संभल में बुलडोजर की कार्रवाई हिंंसा वाले इलाके में नहीं बल्कि दूसरी तहसील में की गई है। संभल के जिस इलाके में हिंसा हुई वह इलाका सदर तहसील के अंतर्गत आता है, बल्कि जहां बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है, वह चंदौसी इलाका कहलाता है। प्रशासन की माने तो इस कार्रवाई के पहले ही नोटिस दिया गया था। बाद में इसे अंजाम दिया गया।

इसके बाद हमे 3 दिसम्बर 2024 की एक रिपोर्ट मिली, अमर उजाला की इस रिपोर्ट के मुताबिक चंदौसी में आठ नवंबर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। तहसील रोड से बदायूं चुंगी, पावर हाउस कालोनी मालगोदाम रोड, रेलवे स्टेशन, सुभाष रोड, फव्वारा चौक, गांधी रोड तक अतिक्रमण को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। 24 नवंबर को संभल में बवाल होने के कारण अभियान रोक दिया था।

पड़ताल में हमे बुलडोजर एक्शन को लेकर NBT की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। एक अक्टूबर 2024 की इस रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्टमें जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सभी नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे। अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है। हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों। सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी। जस्टिस गवई ने कहा कि अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक स्ट्रक्चर है चाहे मंदिर हो या दरगाह या फिर गुरुद्वारा, यह सभी के लिए बाधा नहीं बन सकी। सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है। अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, तो बुलडोजर एक्शन हो सकता है। हालांकि, तोड़-फोड़ के लिए समय देना होगा।

इसी सम्बन्ध में 13 नवम्बर 2024 को न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर घर में अवैध निर्माण किया गया है तो उसपर आगे भी एक्‍शन जारी रहेगा। सरकारी तंत्र के पास यह पूरा अधिकार है कि वो अवैध रूप से बनाए गए मकान पर एक्‍शन लें। कोर्ट ने कहा किसी एक की गलती से सबको मकान से वंचित नहीं किया जा सकता।

दावासंभल में मुसलमानों की हत्या के बाद योगी सरकार बुलडोजर से अत्याचार कर रही है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उल्लंघन किया गया है।
दावेदारसदफ आफरीन, आईपी सिंह समेत अन्य।
निष्कर्षसंभल में हिंसा के बाद लोगों पर बुलडोजर एक्शन नहीं लिया गया। बुलडोजर की कार्रवाई हिंंसा वाले इलाके में नहीं बल्कि दूसरी तहसील में की गई है। साथ ही यह एक्शन अवैध निर्माण के खिलाफ किया गया है।

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