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फर्जी शिक्षिका अनामिका शुक्ला: यूपी में ब्राह्मणों का नौकरियों पर कब्जे का दावा भ्रामक है

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सोशल मीडिया पर ‘जी उत्तरप्रदेश उत्तराखंड’ न्यूज़ चैनल का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में उत्तर प्रदेश में एक महिला टीचर द्वारा नौकरी में फर्जीवाड़े के बारे में बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में अनामिका शुक्ला नाम की महिला 25 विद्यालयों में पढ़ा रही थी और 1 करोड़ वेतन भी ले लिया। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लोग दावा कर रहे हैं कि इस प्रकार साढ़े तीन प्रतिशत ब्राह्मणों ने देश के हर संवैधानिक पद पर कब्जा कर लिया है।

THE VOICE OF BAHUJAN नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, ‘उत्तर प्रदेश में “अनामिका शुक्ला” महिला 25 विद्यालयों में पढ़ा रही थी और 1 करोड़ वेतन भी ले लिया! 3.5% ब्राह्मणों ने देश के हर संवैधानिक पद पर कब्जा कर लिया क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री की कोई जवाबदारी नहीं है!’

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फैक्ट चेक

पड़ताल के दौरान हमे यह वीडियो ‘जी उत्तरप्रदेश उत्तराखंड’ न्यूज़ चैनल के यूट्यूब चैनल पर मिला। 18 मार्च 2025 के इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अनामिका शुक्ला के नाम पर अलग अलग जिलों में नौकरी कर रहे हैं, इस मामले की जांच अब चार विभागों को सौंपी गयी है।

इसी सम्बन्ध में हमे दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट मिली, इसके मुताबिक यूपी के गोंडा निवासी सुनील कुमार त्रिपाठी की शिकायत पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने कई अहम आदेश जारी किए हैं। अब भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बेसिक शिक्षा विभाग और वित्त विभाग को इस घोटाले की तह तक जाने के लिए निर्देशित किया गया है। सुनील कुमार त्रिपाठी का कहना है कि इस घोटाले में प्रदेश भर में 20 से ज्यादा फर्जी शिक्षकों ने अनामिका शुक्ला की मार्कशीट का इस्तेमाल कर करोड़ों की सैलरी हड़प ली।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 2020 में जब यह मामला पहली बार सामने आया था, तब अनामिका शुक्ला के नाम पर नौकरी करने वालों के खिलाफ गोंडा नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी। एसटीएफ ने कई लोगों को जेल भी भेजा लेकिन अभी भी कुछ जिलों में फर्जी शिक्षक वेतन उठा रहे हैं। अब जब सूचना आयोग ने रिपोर्ट मांग ली है, तो कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ना तय है। 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में बड़ा खुलासा हो सकता है।

इस दौरान हमें 5 जून 2020 को प्रकाशित आजतक की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला पहली बार जून 2020 में प्रकाश में आया था। उत्तर प्रदेश राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में कार्यरत एक शिक्षिका का वेतन 1 करोड़ निकला। जांच के दौरान केजीबीवी में काम करने वाली अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका अमेठी, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ और अन्य जिलों में एक साथ 25 स्कूलों में काम करती हुई पाई गईं।

पड़ताल में आगे हमें 2 जून 2022 को प्रकाशित हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट मिली। जिसके मुताबिक फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कस्तूरबा विद्यालय बछरावां में शिक्षिका की नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका अनामिका को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली महिला का असली नाम मंजेश कुमारी उर्फ अंजली है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में एक और अन्य महिला को कासगंज से गिरफ्तार किया था। अनामिका के नाम से नौकरी करने वाली महिला का असली नाम प्रिया जाटव है। हालंकि abp न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस ने जब इस महिला से सख्ती से पूछताछ की तो उसने अपना असली नाम सुप्रिया जाटव बताया।

Source: Dainik Bhaskar

वहीं ETV भारत के मुताबिक 14 जून 2020 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली बबली यादव को गिरफ्तार किया गया था। बबली कानपुर जिले के रसूलाबाद की रहने वाली है। मैनपुरी के पुष्पेंद्र जाटव ने तीन लाख रुपये लेकर बबली की नौकरी लगवाई थी। वहीं हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक 12 जून 2020 को यूपी पुलिस ने अनामिका शुक्ला बनकर अंबेडकर नगर के कस्तूरबा में नौकरी कर रही मैनपुरी की अनीता को गिरफ्तार किया था।

वहीं 16 जून 2020 को प्रकाशित प्रभात खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित अनामिका शुक्ला फर्जी शिक्षक मामले में यूपी एसटीएफ ने बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी दस्तावेजों के जरिये शिक्षक की नौकरी दिलाने के मामले में एसटीएफ ने तीन लोगों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने इस मामले के मुख्य आरोपित मैनपुरी निवासी व फर्रुखाबाद में सहायक अध्यापक पुष्पेंद्र जाटव उर्फ राज, जौनपुर में बेसिक शिक्षा कार्यालय में जिला समन्वयक अधिकारी आनंद तथा लखीमपुर में बेसिक शिक्षा कार्यालय के प्रधान लिपिक रामनाथ को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार आरोपित राज उर्फ पुष्पेंद्र जाटव उर्फ गुरुजी ही गिरोह का सरगना है। पूछताछ में पुष्पेंद्र ने बताया कि वह सुशील पुत्र गुलाब चंद्र के नाम से फर्जी तरीके से सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त है। वर्ष 2010 में वह आरोपित प्रधान लिपिक रामनाथ के संपर्क में आया था।

13 जून 2020 को प्रकाशित जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोंडा के भैया चंद्रभान विद्यालय में असली अनामिका शुक्ला को नौकरी दी गई है। भुलईडीह की अनामिका शुक्ला के नाम पर प्रदेश के कई कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पूर्णकालिक विज्ञान शिक्षक के पद पर नौकरी की जा रही थी लेकिन, उन्होंने बीएसए को दिए पत्र में कहा था कि वे कहीं नौकरी नहीं कर रहीं। आवेदन किया था लेकिन, काउंसिलिंग में प्रतिभाग नहीं कर पाईं। प्रबंधक ने अनामिका को विद्यालय के प्राइमरी अनुभाग में शिक्षक पद पर शासन द्वारा देय वेतनमान में चयनित किया है। उन्होंने कहा कि उनके यहां विद्यालय के प्राइमरी अनुभाग में छात्र संख्या अधिक है। वहीं अनामिका योग्य हैं। इसको लेकर उन्हें नियुक्त किया जा रहा है।

दावाउत्तर प्रदेश में अनामिका शुक्ला नाम की महिला 25 विद्यालयों में पढ़ा रही थी और 1 करोड़ वेतन भी ले लिया। इस प्रकार 3.5% ब्राह्मणों ने देश के हर संवैधानिक पद पर कब्जा कर लिया है।
दावेदारTHE VOICE OF BAHUJAN
निष्कर्षयूपी में अनामिका शुक्ला फर्जी शिक्षक घोटाले का मामला साल 2020 का है। इस मामले में पुलिस ने अनामिका शुक्ला नहीं, उसके डोक्युमेंट की मदद से अलग अलग जिलों में नौकरी कर रहे थे। ऐसे में ब्राह्मण का सभी नौकरियों पर कब्जे का दावा भ्रामक है।

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