सोशल मीडिया पर अखबार में छपी एक खबर की कटिंग वायरल है। खबर की हेडलाइन है ‘ टिटहरी का अंडा फूट गया ..छह साल की बच्ची को पंचायत ने जाति से निकाल बाहर किया।’ हालांकि पड़ताल में यह मामल पुराना साबित हुआ।
शैलेंदर वर्मा ने एक्स पर लिखा, ‘ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक। सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ? SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ? तुम्हारी बात कौन सुनेगा ? फुले फिल्म का विरोध भी जारी है हिन्दुओं’
ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक।
— Shailesh Verma (@shaileshvermasp) April 22, 2025
सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ?
SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ?
तुम्हारी बात कौन सुनेगा ?
फुले फिल्म का विरोध भी जारी है हिन्दुओं pic.twitter.com/smSylHydmJ
जयंतीलाल परमार ने लिखा, ‘ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक। सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ? SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ? तुम्हारी बात कौन सुनेगा’
ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक। सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ? SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ? तुम्हारी बात कौन सुनेगा ?
— Jayantilal Parmar Student (@THEJP4PARMAR) April 22, 2025
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वहीं उज्जवल लटकार ने लिखा, ‘ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक। सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ? SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ? तुम्हारी बात कौन सुनेगा’
ये है हिंदु राष्ट्र की एक छोटी सी झलक। सोच लो की लोकतंत्र में ये हाल है तो जब मनुस्मृति लागू होगी तब क्या होगा ? SC/ST/OBC का क्या हाल होगा ? तुम्हारी बात कौन सुनेगा ?
— Ujwal Latkar AAP (@UjwalLatkar) April 22, 2025
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फैक्ट चेक
दावे की जांच के लिए हमने संबंधित कीवर्ड्स की मदद से गूगल पर सर्च किया। इस दौरान हमें 13 जुलाई 2018 को प्रकाशित BBC हिंदी की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला राजस्थान के बूंदी ज़िले का है। हरीपुरा गांव में टिटहरी का अंडा टूटने पर पांच साल की एक बच्ची को पंचायत ने घर से बाहर रहने की सज़ा सुनाई गई थी। दरअसल, 2 जुलाई 2018 के दिन स्कूल में एक योजना के तहत बच्चों को दूध पिलाने का आयोजन हो रहा था। तभी पांच साल की बच्ची भी स्कूल गई थी। लेकिन लाइन में धक्का-मुक्की लगने पर उसके पैर से टिटहरी के दो-तीन अंडों में से एक अंडा टूट गया।

अंडा टूटने की बात गांव में फैलने से बच्ची को उसके माता-पिता के साथ पंचायत के सामने पेश किया गया। पंचों ने कहा कि जब तक बच्ची को देवी-देवताओं के स्थान पर ले जाकर और वहां उसे नहलाकर नहीं लाओगे तब तक बच्ची घर में प्रवेश नहीं करेगी। अपने फ़ैसले में पंचायत ने परिवार को भी सज़ा सुनाई थी जिसमें अगर बच्ची को किसी ने छुआ या उसके पास गया तो उसे जाति से निकाल दिया जाएगा। चाहे वो उसके माता-पिता ही क्यों न हो। परिवार को सज़ा में ये भी कहा गया कि वे पंचों के लिए नमकीन, भुना हुआ चना और शराब का इंतजाम भी करें।
वहीं दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बूंदी जिले में सथूर ग्राम पंचायत के हरिपुरा में 6 साल की मासूम बच्ची को जातीय पंचायत के फैसले पर समाज से बहिष्कृत करने के घटनाक्रम का खुलासा होने के बाद राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी गांव पहुंची और पीड़ित बच्ची, उसके परिवार तथा पुलिस-प्रशासन से घटना की जानकारी ली। 10 दिन तक इससे बेखबर रहने और पंचों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं करने पर अफसरों को फटकारा। बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष के निर्देश और बच्ची खुशबू के पिता हुकमचंद की रिपोर्ट पर जातीय पंचायत के 10 पंचों के खिलाफ हिंडौली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। मासूम को समाज से बहिष्कृत करने के मामले में जेजे एक्ट-6 (अस्पृश्यता अधिनियम 1955) के तहत केस दर्ज किया गया।
| दावा | छह साल की बच्ची को पंचायत ने जाति से निकाल बाहर किया। |
| दावेदार | शैलेंदर वर्मा, जयंतीलाल परमार व अन्य |
| निष्कर्ष | छह साल की बच्ची को पंचायत ने जाति से बाहर निकालने की घटना साल 2018 की है। बच्ची को टिटहरी का अंडा फोड़ने पर यह सजा सुनाई गई थी। |
