Home धर्म क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र को लेकर रामभद्राचार्य का वायरल बयान फर्जी है
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क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र को लेकर रामभद्राचार्य का वायरल बयान फर्जी है

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सोशल मीडिया पर मोलिटिक्स का एक पोस्टकार्ड वायरल है। पोस्टकार्ड में गुरु रामभद्राचार्य की तस्वीर के साथ लिखा है कि, ‘हम ब्राह्मण हैं हम उच्च जाति के हैं क्षत्रिय” वैश्य शूद्र ये हमारे मूत्र से पैदा हुए हैं सदियों से लोग ब्राह्मणों के चरण धो कर पीते हैं!’ दावा किया जा रहा है कि रामभद्राचार्य ने निचली जाति के लिए अपमानजनक बातें की हैं। हालांकि हमारी पड़ताल में यह दावा भ्रामक साबित हुआ है।

दिव्या कुमारी ने लिखा, ‘रामभद्राचार्य जैसे इस गधे आदमी से ज्ञानपीठ पुरस्कार वापस लिया जाए ये ज्ञानपीठ जैसे बड़े पुरस्कार की मर्यादा को गिरा रहा है। इस पुरस्कार के लायक नहीं है ये..’

दयानंद कांबले ने लिखा,’इसकी निचता के लिए शब्द नही मिल रहे.. आप कुछ बोलिये इस अंधे के बारे में…’

वहीं राजू परुलेकर, शोभनाथ राव और प्रोफेसर आनंद प्रकाश मिश्रा ने भी यही दावा किया है।

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फैक्ट चेक

दावे की पड़ताल में संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च करने पर हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली। इसके बाद हमने वायरल पोस्टकार्ड को मालिटिक्स के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर खंगाला। इस दौरान वायरल पोस्टकार्ड से मिलता-जुलता एक पोस्टकार्ड हमें मोलिटिक्स के एक्स हैंडल पर 2 दिसंबर 2025 को पोस्ट मिला। इस पोस्टकार्ड पर रामभद्राचार्य के बयान को कोट करते हुए लिखा है कि ‘हम महिला को पत्नी नहीं, धर्मपत्नी कहते हैं! WIFE का फुलफॉर्म बताकर फंसे जगद्गुरु रामभद्राचार्य की सफाई!’

दावारामभद्राचार्य ने कहा कि, ‘हम ब्राह्मण हैं हम उच्च जाति के हैं क्षत्रिय” वैश्य शूद्र ये हमारे मूत्र से पैदा हुए हैं सदियों से लोग ब्राह्मणों के चरण धो कर पीते हैं!’
दावेदारदिव्या कुमारी और दयानंद कांबले
निष्कर्षरामभद्राचार्य ने इस प्रकार का कोई बयान नहीं दिया है। मोलिटिक्स का वायरल ग्राफिक एडिटेड है।

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