उत्तर प्रदेश में UPSC की परीक्षा में सरेआम नकल का दावा भ्रामक है
सोशल मीडिया पर परीक्षा में सामूहिक नकल का एक वीडियो वायरल है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश का है, जहां UPSC की परीक्षा में सरेआम नकल कराई जा रही है। हालांकि पड़ताल में यह दावा भ्रामक साबित हुआ।
डॉ. राजेश प्रजापति शिल्पकार नाम के एक्स हैंडल ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश में IAS परीक्षा में सरेआम नकल करबाई जारही है। पीएम नरेंद्र मोदी जी ने बिना परीक्षा के पहले ही लेटरल इंट्री के नाम पर प्रधानमंत्री कार्यालय में IAS अधिकारियों की भर्ती की गई थी। अब कलेक्टर जैसे अधिकारी भी नकल से पास होकर देश चलाएंगे।’
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वायरल वीडियो की जांच के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान यह वीडियो हमें 29 फरवरी 2024 को न्यूज़ 24 के यूट्यूब चैनल पर अपलोड मिला। न्यूज़ 24 के मुताबिक, यह वीडियो बाराबंकी के सिटी लॉ कॉलेज का है।
वहीं 28 फरवरी 2024 को प्रकाशित ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो एक छात्र ने ही बनाया था। छात्र शिवम सिंह का आरोप है कि वह 21 फरवरी को जब अपना प्रवेश पत्र लेने गया तो वहां के प्रिंसिपल ने उसे ऑफिस में बुलाकर नकल करवाने के लिए रुपये मांगे। शिवम ने रुपये देने से मना कर दिया। आरोप है कि उसे एडमिट कार्ड नही दिया गया। 26 फरवरी को वह फिर कॉलेज गया तो उससे कहा गया कि परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाना, वहां प्रवेश पत्र मिल जाएगा। मंगलवार को जब वह परीक्षा केंद्र सिटी लॉ कॉलेज पहुंचा तो उसका प्रवेश पत्र नहीं था। उसने देखा कि कमरे में गाइड रखकर नकल हो रही है। उसने फेसबुक पर सामूहिक नकल का वीडियो वायरल कर दिया।
वहीं 8 मार्च 2024 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक नकल के मामले में डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने एक जांच कमिटी का गठन किया था। जिसके बाद जांच कमिटी ने सिटी लॉ काॅलेज पर को परीक्षा केंद्र बनाने पर 6 साल के प्रतिबंध के साथ दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया था।
दावा | उत्तर प्रदेश में IAS परीक्षा में सरेआम नकल कराई जा रही है। |
दावेदार | डॉ. राजेश प्रजापति शिल्पकार |
निष्कर्ष | वायरल वीडियो बाराबंकी के सिटी लॉ काॅलेज का है। फरवरी 2024 में आयोजित एलएलबी परीक्षा के दौरान काॅलेज में सामूहिक नकल हुई थी। इस घटना के बाद सिटी लॉ कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने पर 6 साल के प्रतिबंध के साथ दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। |
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