सोशल मीडिया पर अखबार में छपी एक खबर की कटिंग वायरल है। खबर की हैडलाइन है, ‘दलितों को दर्शन से रोका… लट्ठ चले’, जिसमें बताया गया है कि मध्य प्रदेश के मुरैना में आसमानी माता का मंदिर है। मंदिर में दलित पूजा करना चाहते थे लेकिन पुजारी ने पूजा करने नहीं दी और उनके साथ मारपीट की।
निखिल चावड़ा ने अखबार की कटिंग एक्स पर शेयर कर लिखा, ‘पुजारी परिवार को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाए।’
बहुजन ब्रिगेड ने लिखा, ‘मध्यप्रदेश के मुरैना में दलितों को मंदिर में दर्शन करने से पुजारियों ने रोका, विरोध करने पर जमकर की पिटाई।’
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— Bahujan Brigade (@Bahujan_brigade) July 31, 2025
मध्यप्रदेश के मुरैना में दलितों को मंदिर में दर्शन करने से पुजारियों ने रोका, विरोध करने पर जमकर की पिटाई.#muraina #मुरैना #madhypradesh #Dalit #bahujan pic.twitter.com/mDlGsUT34H
चूनमेन नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, ‘पुजारी को कम से कम 11 कटोरी चून देकर सम्मानित किया जाना चाहिए।’
पुजारी को कम से कम 11 कटोरी चून देकर
— चूनमेन (@logical8441) July 31, 2025
सम्मानित किया जाना चाहिए। pic.twitter.com/IuvOai7UbA
वहीं लवकुश जाटव ने भी यही दावा किया है।
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फैक्ट चेक
इस दावे की पड़ताल के लिए हमने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें 21 जुलाई 2025 को प्रकाशित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक मुरैना जिले के माधोपुरा क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध आसमानी माता मंदिर में सोमवार दोपहर दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं पर कुछ लोगों ने अचानक हमला कर दिया। घटना के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद लाठी-डंडे और पथराव भी हुआ। सूचना पर सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। दरअसल, आसमानी माता का मंदिर पर प्रजापति समाज का परिवार लंबे समय से पूजा अर्चना करता चला रहा है। मंदिर मौके की जगह पर है, आज उसकी कीमत करोड़ों में है। प्रजापति के अनुसार, ब्राह्मण समाज के कुछ लोग उस मंदिर को हथियाना चाहते हैं। वह उन्हें भगाकर उस पर कब्जा करना चाहते हैं। घटना के बाद दोनों पक्ष सिटी कोतवाली पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ मारपीट, हमले और गाली-गलौज की शिकायत दर्ज कराई।
पड़ताल में आगे हमें 21 जुलाई 2025 को Morena City News नाम के फेसबुक पेज पर आसमानी माता मंदिर पर पथराव का एक वीडियो मिला। कैप्शन में बताया गया है कि आसमानी माता मंदिर पर दो गुटों के बीच जमकर पथराव हुआ। मुरैना शहर की वेयरहाउस रोड माधोपुर की पुलिया पर स्थित आसमानी माता मंदिर पर पूजा अर्चना करने गए लोगों को मंदिर की देखरख करने वाले प्रजापति समुदाय के लोगों ने बंधक बनाकर मारपीट की। घटना की जानकारी लगते ही मोहल्ले वाले लोगों ने किया विरोध तो दोनों पक्षों में जमकर पथराव हुआ। वमुश्किल बल प्रयोग करके आस पड़ोस के लोगों ने मंदिर के अंदर बंधक बनाए गए महिला पुरुषों को बाहर निकाला।

पड़ताल में आगे हमें दोनों पक्षों द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर मिली। मंदिर के पुजारी राजेश उर्फ़ राजू प्रजापति ने एफआईआर में बताया है कि 21 जुलाई की सुबह सुधा तिवारी, सुनीता सिकरवार, प्रीती यादव व रविंदर शर्मा आसमानी माता मंदिर में पूजा करने आये और मुझे गालियां देने लगे। उन्होंने कहा कि तू मंदिर में कैसे आ गया? तो मैंने कहा कि मंदिर को किसी का भी है कोई भी पूजा कर सकता है। इसके बाद उन लोगों ने मेरे परिवार पर हमला कर दिया। इतने में ही मोनू यादव, दिलीप, सविता और सुनील जाटव भी डंडा लेकर आ गया और मारपीट करने लगा।

वहीं दुसरे पक्ष रविंदर शर्मा ने अपनी एफआईआर में बताया कि मैं सुधा तिवारी, सुनीता सिकरवार और प्रीती यादव आसमानी माता मंदिर में पूजा करने गए थे। मंदिर में राजेश प्रजापति, मीना प्रजापति, कृष्णा प्रजापति पहले से ही मौजूद थे। जिन्होंने हमें गाली देते हुए बोला कि तुम लोग मंदिर में कैसे आ गए? यह मंदिर मेरा है। इसके बाद मैंने कहा कि यह मंदिर तो सभी का है तुम पूजा करने से क्यों रोक रहे हो। इतने में ही राजेश प्रजापति, मीना प्रजापति, कृष्णा प्रजापति ने वहां पड़े इंटों से हमला कर दिया। चिल्लाने की आवाज सुनने के बाद वहां मोनू यादव, दिलीप, सविता और सुनील जाटव मुझे बचाने आये तो उन्होंने उन पर भी हमला कर दिया।

दोनों पक्षों के बीच इससे पहले भी दो-तीन बार लड़ाइयां हो चुकी है। 14 जून 2025 को प्रकाशित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर में मांस पकाने का मामला भी सामने आया था। हिंदू संगठनों ने मंदिर के सेवादार परिवार पर मांस पकाने का आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि आसमानी माता मंदिर परिसर में हनुमान जी का मंदिर भी है, जहां भरोसी प्रजापति और उनकी पत्नी कमला प्रजापति कई सालों से रह रहे हैं और मंदिर की सेवा कर रहे हैं। आरोप है कि इन्हीं लोगों ने रात में बकरे की बलि दी और मंदिर परिसर में मांस पकाया। इस दौरान मंदिर में मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया। जिसमें एक कटोरे में मांस रखा दिखाई दे रहा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी राम भरोसी प्रजापति, उसके बेटे मनोज प्रजापति, बलराम प्रजापति, राजू प्रजापति और गौरी प्रजापति पर बीएनएस की धारा 353 के तहत मामला दर्ज किया था।

इस घटना के बाद प्रजापति समाज ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में कहा गया है कि मंदिर प्रजापति समाज का है। पिछले 70 साल से इस पर समाज के लोगों का अधिकार है। कुछ लोग मंदिर पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं, जिसमें अमित उपाध्याय नामक व्यक्ति मुख्य रूप से शामिल है। कब्ज चाहने वाले लोगों ने 3 महीने पूर्व मंदिर के पुजारी को 20 लाख रुपए का लालच देकर मंदिर छोड़ने को कहा था, जिस पर पुजारी ने इनकार कर दिया था। 16 अप्रैल 2022 को मंदिर पर कब्जा चाहने वाले लोगों ने मंदिर पर गोली चलाई थी। गोली मंदिर में पूजा करने वाली शांति बाई को लगी थी।
इसके बाद हमने ‘मुरैना सिटी न्यूज’ से सम्पर्क किया तो हमारी बातचीत पत्रकार प्रशांत शर्मा से हुई। प्रशांत शर्मा ने हमे बताया कि मंदिर में प्रजापति समाज पूजा करता है, इसी परिसर में उनका निवास भी है। सावन के दूसरे सोमवार 21 जुलाई को किसी दलित को पूजा करने से नहीं रोका गया था। प्रशांत ने आगे हमे बताया कि असल में यह मंदिर की जमीन एक शिवहरे परिवार की है। उन्होंने यहाँ मंदिर बनवाया था जिसके बाद प्रजापति परिवार ने कब्जा कर लिया। जिसके बाद शिवहरे परिवार ने अदालत की शरण ली। इस प्रकरण में वो साल 1991 में ही अदालत से केस जीत चुके हैं लेकिन अभी कब्जा नहीं हटा है।
प्रशांत ने हमे इस प्रकरण में शिकायतकर्ता हरकुंअर देवी पत्नी स्व. चिरौंजीलाल शिवहरे का मोबाइल नम्बर और उनकी शिकायत-अदालत के आदेश की कॉपी भी उपलब्ध करवाई। हरकुंअर देवी ने अपनी शिकायत में बताया है कि माधोपुर की पुलिया पर मेरा एक प्लॉट है। 35 साल पहले मेरे परिवार द्वारा वहां एक मंदिर बनाकर उसमें हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की गई थी। साथ ही एक छोटा सा शेड बनवाया गया था। इस जमीन को वहां के स्थानीय निवासियों बलराम प्रजापति, ज्योति प्रजापति, राजू प्रजापति ने मंदिर में अवैध कब्ज़ा कर निवास बना लिया। इसके बाद 1990 में हमने कोर्ट में केस किया और 1991 में हम केस जीत गए। उसके बाद प्रशासन ने मेरे प्लॉट को खाली करा दिया। लेकिन यह लोग पूजा पाठ के लिए बहाने आते रहें और धीरे धीरे यहां अपना निवास बना लिया।


इसके बाद हमने हरकुंअर देवी के बेटे रामकुमार शिवहरे से बात की। रामकुमार ने बताया कि माधोपुर की पुलिया पर हमने मंदिर बनवाया था, पास में ही खाली जगह थी लेकिन वहां एक प्रजापति परिवार कब्ज़ा कर लिया था। 1991 में हम केस जीत गए और प्रशासन ने वहां रह रहे लोगों को हटा भी दिया था। लेकिन वह लोग वापस वहां अपना निवास बना कर रहने लगे। इस बीच मेरे पिता का स्वास्थ ख़राब चल रहा था इसलिए मैं मामले पर ध्यान नहीं दे पाया। हाल ही में जब मंदिर में मांस खाने की बात सामने आई तो मैंने प्रशासन से एक बार फिर गुहार लगाई। मेरी मांग है कि मंदिर से ऐसे लोगों को कब्जा हटाया जाए जो वहां असमाजिक गतिविधियां कर रहे हैं, मंदिर का अपमान कर रहे हैं।
चूंकि प्रजापति समाज का आरोप है कि अमित उपाध्याय मंदिर की जमीन को कब्जाना चाहते हैं इसीलिए हमने उनसे भी सम्पर्क किया। अमित उपाध्याय ने बताया कि मंदिर में प्रजापति समाज के लोग रहते हैं, पूजा भी वहीं करते हैं। दो माह पूर्व मंदिर में मांस का सेवन हुआ था। इसका मुझ समेत सर्व समाज के लोगों ने विरोध किया था हालाँकि एफआईआर मैंने दर्ज करवाई थी इसीलिए मुझ पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है कि मैं मंदिर को कब्जाना चाहता हूँ।
अमित उपाध्याय का कहना है कि मंदिर को कब्जाने की किसी की मंशा नहीं हैं। वहां कोई भी पुजारी हो, मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं हैं बस मंदिर की पवित्रता को बनाए रखा जाए। साथ ही, उन्होंने बताया कि मंदिर में कोई ब्राह्मण पुजारी नहीं हैं।
इसके बाद हमने मुरैना सिटी कोतवाली थाना प्रभारी दीपेन्द्र सिंह यादव से सम्पर्क किया। उन्होंने बताया कि आसमानी माता मंदिर में ब्राह्मण पुजारी द्वारा किसी दलित को रोकने की बात में कोई सच्चाई नहीं हैं। इस मंदिर में प्रजापति समाज से पुजारी हैं। दस दिन पहले दो पक्षों में विवाद हुआ था, उससे पूर्व कुछ भक्तों ने मांस सेवन के आरोप में विरोध प्रदर्शन किया था। घटना में किसी तरह का जातिगत एंगल नहीं हैं।
| दावा | मुरैना के आसमानी माता मंदिर में पुजारी ने दलितों को पूजा करने से रोका और उनके साथ मारपीट की। |
| दावेदार | लवकुश जाटव, निखिल चावड़ा, बहुजन ब्रिगेड |
| निष्कर्ष | मुरैना के आसमानी माता मंदिर में पुजारी द्वारा दलितों को पूजा करने से रोकने का दावा गलत है। असल में मंदिर में अभी प्रजापति परिवार पूजा करता है, 21 जुलाई को उनका दूसरे पक्ष से विवाद हुआ था। साथ ही, प्रजापति ओबीसी वर्ग में आते हैं। |
