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दलित होने की वजह से सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज के हाथों से पर्चा नहीं लेने का दावा भ्रामक है

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उत्तर प्रदेश की कौशांबी सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में पुष्पेंद्र सरोज कह रहे हैं कि ‘मैं दलित समाज से आता हूं, इसलिए चुनाव के वक्त मेरे हाथों से पर्चा नहीं लिया गया था।’ दावा किया जा रहा है कि दलित समाज से होने के कारण पुष्पेंद्र सरोज को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। हालंकि हमारी पड़ताल में यह दावा भ्रामक साबित हुआ।

डॉ. शीतल यादव ने एक्स पर लिखा, ‘दलित समाज से होने के कारण चुनाव प्रचार के वक्त मेरे हाथों से पर्चा नहीं लिया गया था। ~ पुष्पेंद्र सरोज (सपा सांसद) इसीलिए मैं कहती हूं हम महान देश भारत के घटिया समाज में रहते हैं।’

मीना कोटवाल ने लिखा, ‘”मैं दलित समाज से आता हूं, इसलिए चुनाव के वक्त मेरे हाथों से पर्चा नहीं लिया गया था…” – पुष्पेंद्र सरोज, सांसद, कौशाम्बी इस समाज को जितना जल्दी हो सके बदल देना चाहिए!’

राजेश साहू ने लिखा, ‘मैं दलित समाज से आता हूं इसलिए चुनाव के वक्त मेरे हाथों से पर्चा नहीं लिया गया था। ~ पुष्पेंद्र सरोज, सपा सांसद, कौशाम्बी’

वहीं समर राज और प्रकाश राज पैरोडी ने भी यही दावा किया है।

फैक्ट चेक

दावे की पड़ताल में हमने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें 4 फरवरी 2024 को प्रकाशित ABP न्यूज़ की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की कौशांबी सीट से सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने 4 फरवरी 2024 को पहली बार लोकसभा में अपनी बात रखी। सपा सांसद ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात कहते हुए दलितों पर हो रहे अत्याचार और भेदभाव के मुद्दे को उठाया। यही नहीं उन्होंने दावा किया जब वो खुद लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे तो पर्चा भरते वक्त उनके हाथ से पर्चा नहीं लिया गया क्योंकि वो दलित समाज से आते हैं। पुष्पेंद्र सरोज ने 4 फरवरी 2024 को खुद अपने एक्स हैंडल से इस वीडियो को पोस्ट भी किया है।

पड़ताल में आगे हमें 2 मई 2024 को पुष्पेंद्र सरोज के एक्स हैंडल पर कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र से नामांकन भरने की तस्वीरें पोस्ट मिली। पहली तस्वीर में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पुष्पेंद्र सरोज अपने हाथों से निर्वाचन अधिकारी को नामांकन पत्र दे रहे हैं। वहीं निर्वाचन अधिकारी भी विनम्रता से नामांकन स्वीकार कर रहे हैं।

पड़ताल में आगे हमें नामांकन के बाद पुष्पेन्द्र सरोज का एक इंटरव्यू मिला। जिसमें पुष्पेन्द्र ने कहा कि उन्हें लोगों का समर्थन मिल रहा है, इस बार हमारी जीत होगी। इस वीडियो में पुष्पेन्द्र ने कहीं भी जातिगत भेदभाव का जिक्र नहीं किया।

एक अन्य वीडियो में पुष्पेन्द्र ने कहा कि मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी है। मैं लोगों की सेवा करूँगा, इस बार जनता चुनाव लड़ रही है। जनता बदलाव चाहती है। यहाँ भी उन्होंने नामांकन में किसी तरह का जातिगत भेदभाव का आरोप नहीं लगाया था।

वहीं एक अन्य वीडियो में पुष्पेन्द्र और उनके पिता इन्द्रजीत सरोज नामांकन करते हुए नजर आ रहे हैं। नामांकन के बाद इन्द्रजीत सरोज ने मीडिया से बात भी की लेकिन उन्होने किसी तरह जातिगत भेदभाव का आरोप नहीं लगाया।

वहीं 3 मई 2024 को प्रकाशित हिंदुस्तान की रिपोर्ट में बताया गया है कि सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज ने प्रस्तावकों के साथ नामांकन किया। उनके जुलूस के बाद पुष्पेंद्र के पिता इंद्रजीत सरोज भी नामांकन करने पहुंच गए। उन्होंने भी सपा से ही नामांकन किया। इंद्रजीत सरोज ने कहा कि भाजपा सरकार में विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के पर्चे खारिज किए जा रहे हैं। गुजरात व एक अन्य प्रांत के दो प्रत्याशियों का नाम बताते हुए कहा कि जबरन उनका पर्चा निरस्त किया गया। इसको देखते हुए उन्होंने एहतियातन पर्चा दाखिल किया है। यदि बेटे का पर्चा निरस्त हुआ तो वह खुद चुनाव लड़ेंगे।

22 अप्रैल 2024 को प्रकाशित हिंस्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक कौशांबी एक अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व संसदीय सीट है। यहाँ सिर्फ दलित वर्ग के प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकते हैं। साल 2024 के चुनाव में पुष्पेंद्र सरोज समेत अन्य 9 लोगों ने चुनाव लड़ा था। सभी प्रत्याशी एससी वर्ग से ही थे। पुष्पेंद्र सरोज समेत 9 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा लेकिन किसी ने भी नामांकन प्रक्रिया में जातिगत भेदभाव का आरोप नहीं लगाया।

दावा दलित समाज से होने के कारण चुनाव प्रचार के वक्त पुष्पेंद्र सरोज के हाथों से पर्चा नहीं लिया गया।
दावेदार मीना कोटवाल, समर राज, शीतल यादव व अन्य
निष्कर्षदलित समाज से होने के कारण लोकसभा चुनाव 2024 में नामांकन के दौरान पुष्पेंद्र सरोज को जातिगत भेदभाव का सामना करने का दावा भ्रामक है। कौशांबी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, उस वक्त उन्होंने या किसी अन्य प्रत्याशी ने नामांकन प्रक्रिया में जातिगत भेदभाव की शिकायत नहीं की थी।

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