सोशल मीडिया पर अखबार में छपी एक खबर की कटिंग वायरल है। खबर की हेडलाइन है कि ‘पैसा नहीं है, कैसे दें जवानों को जनवरी का वेतन।’ अखबार की कटिंग को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के करीब 90000 जवानों को वेतन देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। हालांकि हमारी पड़ताल में यह खबर भ्रामक निकली।
सुभाष फौजी नाम के एक्स हैंडल ने अखबार की कटिंग शेयर कर लिखा, ‘पाकिस्तान को बात बात पर कोसने वाले भांड मीडिया और अंधभक्तों को ते खबर दिखी नहीं होगी । पाकिस्तान के सैनिकों का तो बड़ा मजाक उड़ाते हो कि उनकी सरकार उन्हें कुछ नहीं देती , अब तुम्हारे मोती की क्या हालत है जरा ये भी देख लो एकबार’
पाकिस्तान को बात बात पर कोसने वाले भांड मीडिया और अंधभक्तों को ते खबर दिखी नहीं होगी ।
— Subhash Fouji (@TheSubhashFouji) April 1, 2025
पाकिस्तान के सैनिकों का तो बड़ा मजाक उड़ाते हो कि उनकी सरकार उन्हें कुछ नहीं देती , अब तुम्हारे मोती की क्या हालत है जरा ये भी देख लो एकबारpic.twitter.com/Ul4Mbci2J3
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फैक्ट चेक
दावे की पड़ताल में संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च करने पर हमें 29 जनवरी 2020 को प्रकाशित आजतक की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों के भत्ते दो महीने तक नहीं मिलेंगे। एसएसबी मुख्यालय ने देश भर में अपनी यूनिटों को बताया है कि उनके पास फंड की कमी हो गई है। एसएसबी मुख्यालय ने देशभर में तैनात अपने जवानों को जनवरी और फरवरी के दौरान एरियरों और अन्य वेतन भत्तों का भुगतान रोकने का फैसला किया है। वहीं एसएसबी ने यह भी बताया कि दो महीने के भत्ते रोकने के बाद मार्च में सभी तरह के बकाया एरियर का भुगतान कर दिया जाएगा।

दावा | सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों को वेतन देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। |
दावेदार | सुभाष फौजी |
निष्कर्ष | वायरल अखबार की कटिंग साल 2020 की है। एसएसबी के पास फंड की कमी की वजह से जवानों के भत्तों को दो महीने के लिए रोका गया था। वहीं मार्च में उनके बकाया भत्तों का भुगतान कर दिया गया था। |