सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पीएम मोदी कह रहे हैं कि आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो। जिसक बचपन अन्याय उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो। जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा। मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं? सोशल मीडिया पर इस वीडियो इस प्रकार से पेश किया जा रहा है कि पीएम मोदी जातिगत भेदभाव को लेकर बदले की बात कर रहे हैं।
ममता त्रिपाठी ने लिखा, ‘रूपरेखा तो पहले से ही तैयार हो गई थी…UCC कहते रहे और ले आए UGC… #UGCRegulations को लेकर मोदी सरकार GC वालों की नाराज़गी को बैरोमीटर पर नाप रही है… सोशल मीडिया पर नाराज़गी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता जबतक नाराज़गी ज़मीन पर ना दिखे…चुनावी नफा नुक़सान के अलावा कुछ नहीं सोचते’
ब्रिजेश मिश्रा ने लिखा, ‘तुम मुझे पानी भरने नहीं देते थे, तुम मुझे मंदिर नही जाने देते थे… कितनी चालाकी से ये मोदी उस सवर्ण को अत्याचारी बता रहा है, जिसे सवर्ण समाज ने सर माथे बैठाया… सोचों सवर्ण समाज को सोचना चाहिए कि ये कैसे हिंदुत्व को मज़बूत कर रहा है?’
मधु पूर्णिमा किश्वर ने लिखा, ‘अब तो इस कालनेमी के साथ पूरा हिंदू समाज हिसाब चुकता करेगा! बद दुआयें देर सबेर सही क़रम फल ज़रूर देती हैं।’
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फैक्ट चेक
दावे की पड़ताल में पीएम मोदी के वायरल क्लिप का पूरा वीडियो हमें 21 मार्च 2016 को भाजपा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर पोस्ट मिला। जिसके मुताबिक यह वीडियो डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला रखने के अवसर पर पीएम मोदी के संबोधन का है। लगभग 47 मिनट के वीडियो में ठीक 36:37 मिनट पर पीएम मोदी ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो। जिसक बचपन अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो। जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा। मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा?
पीएम ने कागे कहा, तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे। तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे। तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे। मनुष्य का जो लेवल है ना वहां यह बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जो मानव से कुछ ऊपर है वह बाबा साहब अंबेडकर थे कि जब उनके हाथ में कलम थी। कोई भी निर्णय करने की ताकत थी। लेकिन आप पूरा संविधान देख लीजिए, पूरी संविधान सभा की डिबेट देख लीजिए, बाबा साहेब अंबेडकर की बातों में वाणी में शब्द में कहीं कटुता नजर नहीं आती है। कहीं बदले का भाव नजर नहीं आता है। उनका भाव यही रहा और वह भाव क्या था। मैं अपने शब्दों में कह सकता हूं कि कभी कभार खाना खाते समय दांतों के बीच हमारी जीभ कट जाती है लेकिन हम दांत तोड़ नहीं देते हैं। क्यों? क्योंकि हमें पता है दांत भी मेरे हैं, जीभ भी मेरी है। बाबा साहब आंबेडकर के लिए सवर्ण भी उनके थे और हमारे दलित, पीड़ित, शोषित दोनों ही उनके लिए बराबर थे। इसलिए बदले का नामो निशान नहीं था। कटुता का नामो निशान नहीं था।
बदले की भाव को जन्म देने का और समाज को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देने वाला प्रयास बाबा साहेब आंबेडकर की हर बात में झलकता है और यह देश सवा सौ करोड़ का देश बाबा साहेब अंबेडकर का हमेशा ऋणी रहेगा जिसने देश की एकता के लिए अपने जुल्मों को दबा दिया। भविष्य भारत का देखा और बदले की भावना के बिना समाज को एक करने की दिशा में प्रयास किया। क्या हम सब हमारे राजनीतिक कारण कुछ भी होंगे पराजय को झेलना बड़ा मुश्किल होता है। लेकिन उसके बावजूद भी जय और पराजय से भी समाज का यह बहुत बड़ा होता है। राष्ट्र का जय बहुत बड़ा बता होता है। इसलिए उसके लिए समर्पित होना यह हम सबका दायित्व बनता है।
| दावा | पीएम मोदी अपने एक भाषण में जातिगत भेदभाव को लेकर बदले की बात कर रहे हैं। |
| दावेदार | ममता त्रिपाठी, ब्रिजेश मिश्रा |
| निष्कर्ष | पीएम मोदी का वायरल वीडियो एडिटेड है। पुरे वीडियो में उन्होंने अंबेडकर की प्रशंसा करते हुए कह रहे थे कि उन्हें समाज से बहुत जुल्म सहना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी बदले का भाव नहीं रखा और राष्ट्र के हित के लिए कार्य किया। |
