सोशल मीडिया पर वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक लेटर वायरल है। लेटर के साथ दावा किया जा रहा है कि वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि पिछले पांच वर्षो में अमीर कारोबारियों का 6.15 लाख करोड़ का कर्ज माफ़ कर दिया गया है। हालांकि हमारी पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा, ‘पिछले 5 सालों में धन्ना सेठों के 𝟔,𝟏𝟓𝟎,𝟎𝟎𝟎,𝟎𝟎𝟎,𝟎𝟎𝟎 रुपए माफ़ हुए आप अपने लोन की एक किश्त ना चुका पायें तो घर मुश्तण्डे भेजे जायेंगे, क्रेडिट हिस्ट्री बर्बाद हो जाएगी, संपत्ति की कुर्की होगी किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं पर अमीरों के 6.15 लाख करोड़ रुपए माफ!’
सौरभ मीणा ने लिखा, ‘अब ये मत बोलना कि देश ही मैं भी जरूरी था ! 6.15 लाख करोड़ कर्ज माफ़ कर दिया ! स्कूल की छत गिर जाती है बच्चे मर जाते हैं छत बनाने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है किसानों को राहत देने के लिए न सरकार के पास पैसा नहीं है ! दोस्तों का कर्ज माफ करने के लिए पैसा ही पैसा है’
वेद प्रकाश विद्रोही ने लिखा, ‘वित मंत्री सीतारमण ने #संसद में बताया पिछले पांच वर्षो में #धन्नासेठो के 6.5 लाख करोड़ रूपये का #कर्ज माफ़ किया! #मोदी_भाजपा_संघ_सरकार आमजन सरकार? या सूट-बूट के धन्नासेठो की सरकार?’
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फैक्ट चेक
दावे की पड़ताल में हमने वायरल लेटर की असल कॉपी डिजिटल संसद की वेबसाइट से निकाली। इस लेटर में लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों और वर्तमान वित्त वर्ष (30 सितंबर 2025 तक) के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 6.15 लाख करोड़ से अधिक के Written off किए हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस लेटर में “कर्ज माफ़ी” यानी Waive Off शब्द का इस्तेमाल नहीं, बल्कि उसकी जगह Written off शब्द का इस्तेमाल किया है।

वहीं अगर आप लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय का जवाब पढेंगे तो पाएंगे कि वित्त मंत्रालय इसी लेटर में नीचे यह स्पष्ट किया है कि Bad loan Written-off करने का मतलब यह नहीं होता कि बैंक उस पैसे की वसूली छोड़ देते हैं।
बैंक बाद में भी कोर्ट के ज़रिए, रिकवरी ट्रिब्यूनल, SARFAESI एक्ट, NCLT आदि तरीकों से वसूली की कोशिश जारी रखते हैं।

आगे हम “कर्ज माफ़ी” यानी Waive Off और “बट्टे खाते में कर्ज” यानी Written-off के अंतर को समझेंगे।
ज़ी बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘एनपीए की वसूली न होने पर ऐसे कर्ज को डूबा हुआ मानकर बट्टे खाते में डाल दिया जाता है। इसे Loan Write-Off करना कहते हैं। लोन राइट ऑफ का मतलब कर्ज माफी नहीं होता। बस राइट ऑफ होने के बाद बैलेंस शीट में उस लोन का जिक्र नहीं होता है। हालांकि बैंक की तरफ से उस लोन की वसूल की कार्रवाई जारी रहती है।

ज़ी बिजनेस ने आगे कर्ज माफी यानी waive off को समझाते हुए लिखा, ‘Loan Waiver शब्द का इस्तेमाल आपने किसानों के मामले में बहुत सुना होगा। Loan Waive Off का मतलब कर्जमाफी से है। Loan Waive Off तब किया जाता है जब कर्ज लेने वाला किसी भी हाल में लोन की राशि चुकाने में असमर्थ हो। ऐसे में उसका लोन पूरी तरह से माफ कर दिया जाता है। साल 2008 में कांग्रेस सरकार ने देशभर के किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज माफ कर दिए थे। इसके अलावा अक्सर चुनाव प्रचार के दौरान तमाम पार्टियां भी आपको लोन वेव ऑफ करने के लुभावने वादे करती नजर आती हैं।

| दावा | सरकार ने पिछले 5 सालों में धन्ना सेठों के 6.15 लाख करोड़ रुपए माफ़ कर दिए। |
| दावेदार | सुप्रिया श्रीनेत, सौरभ मीणा व अन्य |
| निष्कर्ष | मोदी सरकार द्वारा उद्योगपतियों के 6.15 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ करने का दावा भ्रामक है। असल में इस कर्ज को बट्टे खाते (Written-off) में डाला गया है। बैंक द्वारा कर्ज की रिकवरी जारी रहेगी। |
