सोशल मीडिया पर भगवा वस्त्र पहने कुछ लोगों का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में सभी व्यक्ति भगवा वस्त्र पहने साधू के वेश में पुलिस स्टेशन के बाहर खड़े नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह सभी पुजारी SC/ST और OBC समुदाय से हैं। जिन्हें यूपी पुलिस ने दलित-पिछड़ा होने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया है।
भिक्कू असंगा वज्राज ने एक्स पर इस वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘मैं योगी आदित्यनाथ जी से पूछना चाहता हूँ — क्या इन संतों को सिर्फ इसलिए जेल भेजा जा रहा है क्योंकि वो SC/ST/OBC समुदाय से आते हैं? क्या उनका अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने वेद-मंत्र का उच्चारण किया? अगर किसी धर्मशास्त्र में लिखा है कि शूद्र मंत्र नहीं पढ़ सकते, तो वो धर्म नहीं, मनुवादी धंधा है। ध्यान रहे, भारत का संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है। लेकिन जब कोई बाबा दलित-पिछड़ा होता है, तभी धर्म के ठेकेदारों को तकलीफ़ होने लगती है। बाबासाहेब ने बिल्कुल सही कहा था — हिंदू धर्म समानता विरोधी धर्म है। ये लड़ाई सिर्फ एक बाबा की नहीं है, ये पूरे बहुजन समाज की आत्मसम्मान की लड़ाई है।’
यह भी पढ़ें: मुरैना में छोटे भाई का शव गोद में लेकर बैठे बच्चे का वीडियो तीन साल पुराना है
फैक्ट चेक
दावे की पड़ताल में सबसे पहले हमने वायरल वीडियो को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान यह वीडियो हमें 12 जुलाई 2025 को प्रकाशित ETV भारत की एक रिपोर्ट में मिला। रिपोर्ट के मुताबिक यह वीडियो उत्तराखंड में हरिद्वार के थाना श्यामपुर का है। जहां पुलिस ने 18 फर्जी साधुओं को गिरफ्तार किया है।

पड़ताल में आगे हमें नवभारत टाइम्स, ईटीवी की रिपोर्ट मिली। जिसके मुताबिक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन कालनेमि लॉन्च किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ समय से उत्तराखंड में कई जगहों से ऐस छदम वेशधारी असामाजिक तत्व पकड़े जा रहे थे, जो साधु-संतों के वेश में भोले-भाले नागरिकों और खासकर महिलाओं को ठगने का काम कर रहे हैं, कांवड जैसी धार्मिक यात्रा में बड़े पैमाने पर ऐसे छदम वेशधारी असामाजिक तत्व प्रवेश कर जाते हैं।
इस ऑपरेशन के तहत हिंदू साधु की वेशभूषा में घूम रहे मुस्लिम युवक भी पकडे गए हैं। कलियर थाना क्षेत्र से पुलिस ने साधु का वेश धारण करने आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले रफीक अन्सारी, महबूब, मौ० अहमद, रशीद, मौ० इमरान और मौ० जैन उद्दीन को गिरफ्तार किया है। यह सभी बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।
वहीं उत्तराखंड परिकल्पना न्यूज़ की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन कालनेमी अभियान के तहत थाना पिरान कलियर पुलिस को गिरफ्तार भेषधारी बाबाओं में से 20 साल से लापता युवक जितेन्द्र भी मिला। जितेन्द्र वर्ष 2005 से अपने घर से लापता था और उसके परिवार को अब तक उसकी कोई खबर नहीं थी। जिसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से जितेन्द्र को उसके परिजनों से मिलाया गया।
| दावा | पुलिस ने दलित-पिछड़ा समाज के पुजारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। |
| दावेदार | भिक्कू असंगा वज्राज |
| निष्कर्ष | यह वीडियो उत्तराखंड का है, जहाँ हरिद्वार में श्यामपुर पुलिस ने 18 फर्जी बाबाओं को गिरफ्तार किया था, इस प्रकरण में किसी तरह का जातिगत एंगल नहीं है। यह सभी फर्जी बाबा हैं जो साधु का वेश धारण कर हरिद्वार में रह रहे थे। |
