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नए इनकम टैक्स रुल के तहत सरकार द्वारा लोगों के सोशल मीडिया की निगरानी करने का दावा भ्रामक है

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सोशल मीडिया पर नए इनकम टैक्स रुल को लेकर एक पोस्ट वायरल है। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत में टैक्स जांच का तरीका जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले प्रस्तावित इनकम टैक्स बिल 2025 के तहत आयकर विभाग टैक्स चोरी रोकने के लिए सोशल मीडिया और ईमेल की भी जांच करेगा। बताया जा रहा है कि इससे सरकार स्वतंत्र रूप से ऑनलाइन प्राइवेसी की निगरानी कर सकेगी। हालांकि पड़ताल में यह दावा गलत निकला।

पुश्पेंद्रे सिंह ने एक्स पर लिखा, ‘ब्रेकिंग: 1 अप्रैल, 2026 से, टैक्स चोरी रोकने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सोशल मीडिया, ईमेल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने की इजाज़त होगी।’

Source: X

ALPHA ANIMAL नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, ‘ब्रेकिंग: 1 अप्रैल, 2026 से, टैक्स चोरी रोकने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सोशल मीडिया, ईमेल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने की इजाज़त होगी।’

रूशी ने लिखा, ‘ब्रेकिंग: 1 अप्रैल, 2026 से, टैक्स चोरी रोकने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सोशल मीडिया, ईमेल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने की इजाज़त होगी।’

वहीं मार्टिन और त्रिपुरारी चौधरी ने भी यही दावा किया है।

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फैक्ट चेक

दावे की पड़ताल में संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च करने पर हमें न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नए इनकम टैक्स कानून को लेकर सोशल मीडिया पर फ़ैल रहे न्यूज़ को भ्रामक बताया है। PIB फैक्ट चेक ने इस दावे की जांच की और स्पष्ट किया कि यह गलत व्याख्या पर आधारित है। खासकर सोशल मीडिया हैंडल @IndianTechGuide द्वारा किए गए दावे में इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के प्रावधानों को गलत तरीके से समझाया गया था।

PIB ने बताया कि इनकम टैक्स अधिकारी केवल कानूनी प्रक्रिया और औपचारिक अनुमति के तहत ही सीमित मामलों में डिजिटल सबूत देख सकते हैं। ये प्रावधान खास तौर पर काले धन और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के मामलों में सर्च और सर्वे के दौरान कार्रवाई के लिए हैं, आम और कानून का पालन करने वाले नागरिकों के लिए नहीं। इनकम टैक्स विभाग को किसी के ई-मेल, व्हाट्सएप, फेसबुक अकाउंट या अन्य डिजिटल डेटा तक स्वतंत्र रूप से रोज़-मर्रा के लिए निगरानी या एक्सेस करने का अधिकार नहीं मिलेगा।

दावा1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स विभाग को सोशल मीडिया, ई-मेल और अन्य निजी डिजिटल डेटा तक पूरी पहुँच मिल जाएगी।
दावेदारपुश्पेंद्रे सिंह, रूशी, त्रिपुरी चौधरी
निष्कर्षइनकम टैक्स विभाग को सिर्फ सर्च और सर्वे के मामलों में, कानूनी अनुमति के बाद ही सीमित डिजिटल डेटा देखने का अधिकार है। इनकम टैक्स विभाग किसी के ई-मेल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया की रोज़ाना या बिना वजह निगरानी नहीं की जा सकती।

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