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आदिवासियों को बंधक बनाकर उनकी जमीन हड़पने का दावा गलत है

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है। जिसमें कई महिलाओं के हाथ बंधे दिख रहे हैं। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि भाजपा द्वारा आदिवासियों को बंधक बनाकर उनकी जमीन हड़पी जा रही हैं। लांकि पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला।

शवेता मीणा नाम के एक्स हैंडल वीडियो को शेयर कर लिखा,

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फैक्ट चेक

दावे की पड़ताल में वायरल वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स सर्च करने पर हमें 17 फरवरी 2022 को प्रकाशित NDTV की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक यह वीडियो बिहार के गया की है। दरअसल, पुलिस प्रशासन आढ़तपुर गांव में मोरहर नदी में बालू घाट का सीमांकन करने गई थी। जहाँ पुलिस और रेत माफिया के समर्थन में उतरे ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हुई। झड़प में दर्जनभर पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं वहीं दूसरी तरफ गुस्साए पुलिसकर्मियों ने बालू माफियाओं के समर्थन में उतरे लोगों पर जमकर लाठियां बरसाई।

इस घटना में कई महिलाओं को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पत्थरबाजी और आगजनी में शामिल महिलाओं की पुलिस ने हाथ पीछे बांधकर जमकर पिटाई की है। इस घटना में घायल दोनों पक्ष से लोगों का इलाज स्थानीय निजी और सरकारी अस्पताल में कराया गया।

दावाआदिवासियों को बंधक बनाकर उनकी जमीन हड़पी जा रही है।
दावेदारशवेता मीणा
निष्कर्षयह वीडियो फरवरी 2022 का है। बिहार के गया में रेत माफिया के समर्थन में उतरे ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। झड़प के बाद पुलिस ने ग्रामीणों के हाथ बांधकर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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