उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप की मौत का मामला सुर्ख़ियों में है। राजीव प्रताप 10 दिनों तक घर से लापता थे जिनका शव भागीरथी नदी से मिला था। सोशल मीडिया पर राजीव प्रताप की मौत को हत्या बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने जिला अस्पताल उत्तरकाशी में एक बड़े भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग की थी। जिसकी वजह से उनकी हत्या कर दी। हालांकि पड़ताल में दावा भ्रामक साबित हुआ।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर इस मामले को शेयर कर लिखा, ‘उत्तराखंड के युवा पत्रकार राजीव प्रताप जी का लापता होना और फिर मृत पाया जाना सिर्फ़ दुखद नहीं, भयावह है। इस मुश्किल वक्त में शोकाकुल परिवार को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और उनके साथ खड़ा हूं। BJP राज में आज ईमानदार पत्रकारिता भय और असुरक्षा के साये में जी रही है। जो सच लिखते हैं, जनता के लिए आवाज़ उठाते हैं, सत्ता से सवाल पूछते हैं – उन्हें धमकियों और हिंसा से चुप कराने की कोशिश की जा रही है। राजीव जी के साथ हुआ पूरा घटनाक्रम ऐसे ही षड़यंत्र की ओर इशारा करता है। राजीव जी की मृत्यु की अविलंब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को बिना देरी न्याय मिलना चाहिए।’
उत्तराखंड के युवा पत्रकार राजीव प्रताप जी का लापता होना और फिर मृत पाया जाना सिर्फ़ दुखद नहीं, भयावह है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 30, 2025
इस मुश्किल वक्त में शोकाकुल परिवार को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और उनके साथ खड़ा हूं।
BJP राज में आज ईमानदार पत्रकारिता भय और असुरक्षा के साये में जी रही है। जो सच… pic.twitter.com/NkKlBswsWA
RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती ने लिखा, ‘नाम – राजीव प्रताप उम्र- 36 साल पढ़ाई – IIMC पेशा – पत्रकारिता और हत्या सिर्फ़ इसलिए हो गई क्योंकि इन्होंने जिला अस्पताल उत्तरकाशी में एक बड़े भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग की। सरकार भाजपा की है और अब आपको पता है की क्यों इस देश में एक आम पत्रकार होना खतरनाक है।’
नाम – राजीव प्रताप
— Priyanka Bharti (@priyanka2bharti) September 29, 2025
उम्र- 36 साल
पढ़ाई – IIMC
पेशा – पत्रकारिता
और हत्या सिर्फ़ इसलिए हो गई क्योंकि इन्होंने जिला अस्पताल उत्तरकाशी में एक बड़े भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग की।
सरकार भाजपा की है और अब आपको पता है की क्यों इस देश में एक आम पत्रकार होना खतरनाक है। pic.twitter.com/e3mMtIRSSY
डॉ. लक्ष्मण यादव ने लिखा, ‘एक निडर पत्रकार राजीव प्रताप (IIMC स्नातक) ने हाल ही में उत्तरकाशी जिला अस्पताल के बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। पत्नी के अनुसार उन्हें इसके बाद धमकियां मिल रही थीं। अब उनका शव बांध किनारे मिला। यह घटना बताती है कि सच्ची पत्रकारिता कितनी जोखिमभरी हो गई है। दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो।’
एक निडर पत्रकार राजीव प्रताप (IIMC स्नातक) ने हाल ही में उत्तरकाशी जिला अस्पताल के बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। पत्नी के अनुसार उन्हें इसके बाद धमकियां मिल रही थीं। अब उनका शव बांध किनारे मिला। यह घटना बताती है कि सच्ची पत्रकारिता कितनी जोखिमभरी हो गई है। दोषियों पर तुरंत… pic.twitter.com/J9d5VvwtNE
— Dr. Laxman Yadav (@DrLaxman_Yadav) September 30, 2025
वहीं लल्लन कुमार, खुरपेंच, अशोक कुमार पांडे, ऋतू चौधरी और मनीष तिवारी ने भी राजीव प्रताप की मौत को हत्या बताकर शेयर किया है।
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फैक्ट चेक
पड़ताल में हमने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें 3 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट मिली। जिसमें पुलिस ने पत्रकार राजीव प्रताप मौत का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना की रात को राजीव शराब के नशे में धुत था। वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। सीसीटीवी कैमरे में राजीव को हाइवे पर रॉन्ग साइड गाड़ी चलाते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही वह सीसीटीवी में लड़खड़ाते हुए भी साफ देखा जा रहा है।
- पुलिस उपाधीक्षक उत्तरकाशी जनक पंवार ने बताया कि 18 सितंबर की शाम लगभग सात बजे राजीव प्रताप अपने कैमरामैन मनबीर कलूड़ा के साथ पुलिस लाईन में नियुक्त अपने दोस्त हेड कांस्टेबल सोबन से मिलने गए थे। यहां तीनों लोग पुलिस लाईन से पीछे ही शहीद स्मारक के आस पास मिले।
- सोबन सिंह व राजीव प्रताप का ड्रिंक करने का प्लान बना। तीनों गाड़ी लेकर बाजार गए। शराब और अन्य खाने पीने की सामग्री लेकर वापस दरबार बैंड के सामने टैक्सी स्टैण्ड के पास पहुंचे। यहां से टैक्सी पार्किंग में ही बैठकर खाने पाने का प्रोग्राम किया।
- रात लगभग 10 बजे तक तीनों लोगों का खाना-पीना चलचा रहा। उसके बाद सोबन सिंह वहां से उठकर अपने घर जाने के लिए गाड़ी निकाली, लेकिन राजीव प्रताप ने फोन पर रूकने के लिए कहा। फिर राजीव व सोबन सिंह का बाजार जाकर होटल में खाना खाने का प्लान बना। यहां बाजार में आकर दोनों ने फिर शराब खरीदकर एक होटल में खाना खाया।
- बस अड्डे में लगे सीसीटीवी से पता चला कि रात 11.00 बजे राजीव प्रताप होटल से बाहर आते हैं। जिसमें वह लड़खडाते हुए देखा जा रहा है। सीसीटीवी में राजीव को नशे की हालत में कार के पीछे पेशाब करते हुए भी देखा जा सकता है। थोड़ी देर बाद सोबन सिंह भी होटल से बाहर आता है। दोनों गाड़ी में बैठते हैं, लेकिन सोबन सिंह कुछ देर बाद गाड़ी से बाहर आ जाता है। राजीव प्रताप गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर आ जाते हैं। गाड़ी के अन्दर राजीव प्रताप के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बैठा नहीं दिखाई दिया।
- रात 11.24 बजे सोबन सिंह की कुछ सेकेंड बात राजीव प्रताप के मोबाइल पर होती है। गाड़ी बद्री तिराहा, तेखला पुल, अन्तिम बार समय 11.38 बजे रात गंगोरी पुल पर लगे सीसीटीवी। कैमरे में गंगोरी की ओर जाती हुई साफ दिखती है। अन्दर राजीव प्रताप के अलावा और कोई व्यक्ति बैठा हुआ नहीं दिखता है। गंगोरी पुल के बाद सीसीटीवी कैमरे बैंक एटीएम व पेट्रोल पम्प पर हैं। दोनों कैमरों की फुटेज चेक की गयी। राजीव प्रताप का वाहन उपरोक्त दोनों कैमरो में कहीं नहीं दिखाई दे रहा है।
- पूछताछ करने पर सोबन सिंह ने बताया कि उसने होटल के सामने राजीव प्रताप को बहुत मनाया कि गाड़ी आगे मत ले जा। उसे नशा भी था. वह कभी- कभी गाड़ी चलाता था, तो इतना अच्छा नियन्त्रण भी नहीं था, लेकिन वह नहीं माना। सोबन ने पुलिस को बताया कि राजीव के कोट बंगला में बहन भी रहती है। उसने सोचा कि राजीव वहां गया होगा। वह आगे उजेली कोटबंगला की ओर पैदल पीछे-पीछे गया, लेकिन उसे राजीव नहीं मिला। फिर यह सोचकर कि सुबह गाड़ी ले लूंगा, वह वापस अपने कमरे में चला गया।
- इसके बाद 11.40 के बीच ही राजीव कहीं गायब हो गया। वह मनेरी की तरफ जाते हुए भी कैमरे में कहीं नहीं दिखा। अनुमान है कि इस बीच गंगोरी में नियंत्रण खोने पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
पुलिस उपाधीक्षक जनक पंवार ने बताया उक्त वाहन का आरआई टेक्निकल के माध्यम से टेक्निकल निरीक्षण करवाया गया। रिपोर्ट के अनुसार वाहन के रोड़ से नदी में गिरते समय गाड़ी के चारों साइड के दरवाजे लॉक थे। शीशे चढ़े हुए थे, जो बाद में गाड़ी नदी में गिरने से टूटे। इंजन ऑन था। गाड़ी की चाबी गाड़ी में ही लगी थी। डिक्की का लॉक खुला था। निरीक्षण टीम के अनुसार जब गाड़ी गिरी होगी, तो झटका लगने के कारण बैक साइड का लॉक खुल गया होगा।
पड़ताल में आगे हमने राजीव के मित्र सोबन सिंह से संपर्क किया। सोबन सिंह ने बताया कि मैं और राजीव दोनों कॉलेज के समय से मित्र हैं। कई दिनों पहले से हमारा खाने पीने का प्लान बन रहा था। 18 सितंबर को राजीव पुलिस लाइन मिलने आये थे। इसके बाद मेरी गाड़ी से हम दोनों बाजार निकले और चौहान ढाबे पर खाना खाया और शराब पी। इसके बाद राजीव ड्राइविंग सीट पर बैठ गए और गाड़ी आगे से मोड़ने को कहकर अकेले गाड़ी लेकर गंगोरी की ओर निकल गए।
इसके बाद मैंने राजीव को फोन किया कि आगे कहां चले गए? राजीव ने बताया कि बस यहीं थोड़ी दूर आगे से गाड़ी मोड़कर ला रहा हूँ। थोड़ी दूर ही उसकी दीदी का घर है। मुझे लगा कि उनसे मिलकर चला आएगा। लेकिन जब वह नहीं आया। वह सुबह वापस आ जायेगा यह सोचकर मैं वापस रूम पर चला गया।

जब राजीव अगले दिन भी नहीं मिला तो मैंने कुछ थानों में संपर्क कर अपनी गाड़ी के बारे में पुछा। मनेरी थाने से मुझे जानकारी मिली कि नदी में एक गाड़ी पड़ी है, जब मैंने गाड़ी की फोटो मंगवाई को तो पता चला कि वह मेरी ही गाड़ी है। जब मौके पर जाकर देखा तो गाड़ी में कोई नहीं था। इसके कुछ दिन बाद राजीव की बॉडी बैराज में मिली।
| दावा | उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने पर पत्रकार राजीव प्रताप की हत्या कर दी गई। |
| दावेदार | राहुल गाँधी, ऋतू चौधरी, लल्लन कुमार व अन्य |
| निष्कर्ष | उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने पर पत्रकार राजीव प्रताप की हत्या का दावा गलत है। राजीव की मौत सड़क हादसे में हुई है। |
