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मणिकर्णिका घाट पर मंदिर तोड़ने का दावा भ्रामक, वायरल तस्वीर पुरानी है

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सोशल मीडिया पर वाराणसी में मणिकर्णिका घाट को तोड़ने की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इसी के साथ एक मंदिर की तस्वीर भी वायरल है। जिसमें मंदिर के सामने नंदी की मूर्ति दिख रही है। साथ ही मंदिर के आप-पास मलबा पड़ा नजर आ रहा है। इस तस्वीर को एक्स पर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर मंदिर को तोड़ दिया गया है।

कृष्ण कांत ने एक्स पर इस तस्वीर को शेयर कर लिखा, ‘हजार-पांच सौ साल पुराने मंदिर, स्नान घाट और मॉल में अगर आपको फर्क नहीं पता है, एक प्राचीन विरासत और उसे तोड़ ताड़ कर पत्थर सीमेंट के नवनिर्माण में अंतर नहीं पता है तो आपका कुछ नहीं हो सकता। ऐसे पागलों से बहस नहीं की जा सकती। काम करने हैं छंटे मूर्खों वाले और बनना है जवाहर लाल नेहरू, तुमसे नहीं हो पाएगा। तुम्हारे लच्छन ठीक नहीं हैं।’

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने लिखा, ‘ये महमूद गज़नवी का नही नरेंद्र मोदी का राज है। जहाँ हमारे “पौराणिक मंदिरों” को तोड़ा जा रहा है। देखिए काशी के मणिकर्णिका घाट पर, विनाश का ये दृश्य। @AAPUttarPradesh 20 जनवरी को यू पी के सभी जिलों में प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने के ख़िलाफ़ आंदोलन होगा। AAP ने काशी के मंदिरों को बचाने के लिये पहले भी आंदोलन किया था हम पर मुक़दमा हुआ था।’

कविश अजीज ने लिखा, ‘ये औरंगजेब और बाबर का बनारस नहीं….. बल्कि मोदी की कांस्टीट्यूएंसी है जहां मणिकर्णिका घाट तोड़ा जा रहा है’

वहीं डॉ. रंजन, प्रगनय गुप्ता, महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस, लुटियंस मीडिया, प्रभाकर नारायणराव पेशवा, अमित, संजीव अवस्थी, जसविंदर कौर, संदीप देव, This Podcast Guy और Saint Soldier Wisdom नाम के सोशल मीडिया यूजर ने भी इसी दावे के साथ तस्वीर पोस्ट की है।

फैक्ट चेक

पड़ताल में हमे यह तस्वीर एक्स यूजर शिवम मिश्रा के एक पोस्ट में मिली। शिवम मिश्रा ने वाराणसी कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान मंदिर तोड़ने की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने 24 अक्टूबर 2021 को इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘काशी विश्वनाथ कॉम्प्लेक्स में ‘कैलाश मंदिर’ की गंदी कहानी, जिसे कुछ ही दिनों में गिराया जा सकता है। इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले लें। यह मंदिर सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया था। महंतों का कहना था कि सरकार इसे गिराने पर तुली हुई है।’

शिवम मिश्रा के इस पोस्ट से यह बात स्पष्ट है कि वायरल तस्वीर का हाल ही में चल रहे मणिकर्णिका घाट के पुनर्निमाण कार्य से कोई लेना देना नहीं है। यह तस्वीर 5 साल पुरानी है।

आगे की पड़ताल में हमे इस मंदिर की कई तस्वीर ‘Cultural heritage of varanasi‘ की वेबसाइट पर मिली। इस मंदिर का नाम ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर ‘ है, इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का मंदिर बताया गया है। रिपोर्ट में लिखा है कि श्री चिंतामणि महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। वाराणसी में स्थित शिवालयों के नामों के अंत में अक्सर ‘ -ईश्वर ‘ प्रत्यय लगा होता है। लेकिन यह मंदिर इस परंपरा से अलग है, जिसका नाम शिव के बड़े पुत्र गणेश के नाम पर रखा गया है, जिन्हें चिंतामणि के नाम से भी जाना जाता है।

हमने वायरल मंदिर की तस्वीर और ‘Cultural heritage of varanasi’ की वेबसाइट पर मौजूद ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर ‘ में कई समानताएं देखी। दोनों तस्वीरों की वास्तुकला, नक्काशी, नंदी, स्तम्भ, मूर्तियाँ एक-दूसरे से मेल खाती हैं।

इसके बाद हमे एक ब्रिटिश आर्कियोलॉजिस्ट, फोटोग्राफर Kevin Standage का एक ब्लॉग मिला। केविन ने फरवरी 2020 में वाराणसी यात्रा के दौरान काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण को लेकर एक आर्टिकल लिखा था। उन्होंने लिखा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान मणिकर्णिका घाट से थोड़ी दूरी पर ‘श्री कुम्भा महादेव मंदिर’ और ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर’ दो मंदिर खोजे गए। गलियारा बनाने के लिए ढाँचों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया से पता चला है कि मंदिरों का उपयोग दुकानों, शयनकक्षों, रसोई, भंडारगृहों और कुछ मामलों में शौचालयों के रूप में भी किया जा रहा था।

केविन के इस ब्लॉग से भी यह बात स्पष्ट है कि वायरल तस्वीर में मंदिर के परिसर में नजर आ रहा मलबा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के समय का है। उस दौरान इस मंदिर के आसपास की इमारतों को तोडा गया था।

इसके बाद हमे वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से विधायक  नीलकंठ तिवारी की फेसबुक प्रोफाइल पर एक वीडियो मिला। इस वीडियो में वायरल तस्वीर वाला ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर ‘ है। नीलकंठ तिवारी ने इस वीडियो में बताया है कि वायरल तस्वीर वाले मंदिर को नहीं तोडा गया है, यह मंदिर सही सलामत है।

Source: Facebook

पड़ताल में आगे हम श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पहुंचे जहां हमें मणिकर्णिका घाट के किनारे श्री चिंतामणि महादेव मंदिर सही सलामत अवस्था में मिला। मंदिर के आसपास भी किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण का कार्य नहीं चल रहा है।

चिंतामणि महादेव मंदिर

पड़ताल में आगे हामारी मुलाकात मंदिर के पुजारी श्री राम प्रसाद द्विवेदी ने से हुई। उन्होंने बताया कि वायरल तस्वीर साल 2018-19 से पहले की है। तब यहां आस पास घर हुआ करते थे। लेकिन उन्हें तोड़कर मंदिर को काशी कॉरिडोर में शामिल किया गया।

मंदिर के सामने पूजा पाठ की सामग्री की दुकान लगाने वाली सोनाली ने हमें बताया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने से पहले चिंतामणि महादेव मंदिर हमारे गली में और दूकान के सामने ही स्थित था। लेकिन कॉरिडोर बनने के दौरान मंदिर के पड़ोस वाले सभी घरों को तोड़ दिया गया और मंदिर को कॉरिडोर में शामिल करने के लिए मंदिर के सामने बाउंड्री बना दी गई। वायरल तस्वीर उसी समय की जब मंदिर के पड़ोस में बसे घरों को तोड़ा गया था और तस्वीर में मंदिर पास पड़ा मलबा उन्ही घरों का है।

चिंतामणि महादेव मंदिर और मणिकर्णिका घाट को जाने वाली गली के बीच कशी विश्वनाथ कॉरिडोर की बाउंड्री

वहीं मंदिर के बगल से ही मणिकर्णिका घाट की ओर जाने वाली गली में चाय की दुकान लगाने वाले नीरज पांडे ने पुष्टि की कि वायरल तस्वीर चिंतामणि महादेव मंदिर की है जिसे कुम्भा महावेद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि अभी मंदिर में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है। यह तस्वीर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के दौरान की है। मंदिर के आसपास घर हुआ करते थे। लेकिन कॉरिडोर बनाने के दौरान सब तोड़ दिया गया। यह तस्वीर भी उसी समय की है।

दुकानदार नीरज पांडेय

इस सम्बन्ध में हमने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा से भी सम्पर्क किया। उन्होंने बताया कि ज्ञानवापी परिसर में इस वक्त किसी मंदिर में तोड़फोड़ नहीं चल रही है।

दावाकाशी में मणिकर्णिका घाट पर मौजूद वर्षों पुराना शिव मंदिर तोड़ दिया गया।
दावेदारसंजय सिंह, कविश अजीज, कृष्णकांत व अन्य
निष्कर्षवायरल तस्वीर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित श्री चिंतामणि महादेव मंदिर की है। साल 2020 में इस मंदिर के पड़ोस में स्थिस घरों को हटाकर इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में शामिल किया गया था। यह तस्वीर उसी समय की है। वर्तमान समय में यह मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में सुरक्षित है।
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